झारखंड : सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बनाने पर हेमंत सोरेन के मंत्री का धमाकेदार बयान! “जनता की आवाज ही सर्वोपरि है…किसी भी हालत में ग्रामीणों के हितों से समझौता नहीं होगा
Hemant Soren's minister makes a scathing statement on the development of Saranda as a wildlife sanctuary! "The voice of the people is paramount; the interests of the villagers will not be compromised under any circumstances."

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि सारंडा वन क्षेत्र को वन्य अभयारण्य (वाइल्ड लाइफ सेंचुरी) घोषित करने से पहले सुरक्षा के व्यापक इंतजाम और मानव संसाधन का विकास अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि सिर्फ कागजों में सेंचुरी घोषित करने से काम नहीं चलेगा, इसके लिए फॉरेस्ट पिकेट की स्थापना और वनकर्मियों की नियुक्ति होनी चाहिए, जिसमें समय लग सकता है.
आदिम जनजातियों की शंकाएं दूर करना अनिवार्य
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि सारंडा को सेंचुरी घोषित करने से पहले आदिम जनजातियों को विश्वास में लेना और उनके मन की शंकाओं को दूर करना अति आवश्यक है.हाल ही में मंत्रियों के समूह ने सारंडा का दौरा किया, जहां आदिम जनजाति के लोगों ने अपनी चिंताएं व्यक्त कीं.जनजातियों ने सवाल उठाया कि जहां सरकार जीव-जंतु की रक्षा के लिए आई है, वहीं मानव-प्राणी की रक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए.लोगों में यह भय है कि सेंचुरी घोषित होने पर उन्हें गांव न छोड़ना पड़े.
जनजातियों के लिए जंगल ही उनके भरण-पोषण और जीविका का मुख्य साधन है, और वे माइनिंग पर भी निर्भर है.उनका कहना है कि उन्होंने ही जंगल को बचाकर रखा है और वे शहरी वातावरण में जिंदा नहीं रह पाएंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि सेंचुरी घोषित करने से पहले इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन आवश्यक है.
संवैधानिक अवहेलना पर नाराजगी
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भारतीय वन्यजीव संस्थान की सिफारिश पर राज्य के पीसीसीएफ द्वारा अपने स्तर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करने के निर्देश पर नाराजगी जताई. उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार जैसे संवैधानिक संस्थान की अनुमति लिए बिना हलफनामा दायर करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि संवैधानिक संस्थान की अवहेलना भी है.
सारंडा में नहीं हुआ है खत्म उग्रवाद
किशोर ने सारंडा के दशकों से वामपंथी उग्रवाद और हिंसा का केंद्र रहे इतिहास की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से उग्रवादी गतिविधियों को कुछ हद तक नियंत्रित किया गया है, लेकिन उग्रवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. उन्होंने चेतावनी दी कि सारंडा के इतिहास को देखते हुए एकतरफा प्रतिबंधात्मक नीति लागू करने से जबरदस्त कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. सरकार को इन सभी पहलुओं पर गहन विचार करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेना चाहिए.









