झारखंड CGL परीक्षा परिणाम पर रोक रहेगी बरकरा, हाईकोर्ट ने जांच के स्तर पर जतायी नाखुशी, 15 अक्टूबर तक मांगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
The Jharkhand CGL exam results remain in abeyance, with the High Court expressing displeasure with the level of investigation and requesting a progress report by October 15.

रांची।जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पेपर लीक प्रकरण की जांच पर झारखंड हाईकोर्ट ने असंतोष जताया है। कोर्ट ने कहा कि जांच का स्तर संतोषजनक नहीं है और सरकार को 15 अक्टूबर तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने सीजीएल परीक्षा परिणाम पर लगी रोक को फिलहाल बरकरार रखा गया है।
हाई कोर्ट ने जेएसएससी (झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन) सीजीएल (कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल) परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच पर तीखे तेवर दिखाये। अदालत ने कहा कि अब तक की जांच संतोषजनक नहीं है और अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 15 अक्टूबर 2025 तक इस मामले पर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे।
आपको बता दें कि सीजीएल-2023 परीक्षा पहली बार 28 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी। पेपर लीक की शिकायत के बाद इसे रद्द कर दिया गया और विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। बाद में 21 और 22 सितंबर 2024 को परीक्षा दोबारा कराई गई, लेकिन उसमें भी पेपर लीक के आरोप लगे। इसके बाद प्रकाश व अन्य की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई, जिस पर यह सुनवाई चल रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सीजीएल परीक्षा परिणाम पर लगी रोक को हटाना इस समय उचित नहीं होगा। हालांकि, सरकार के आवेदन पर अगली सुनवाई में रोक हटाने पर विचार किया जाएगा। अगली सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर निर्धारित की गई है। प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि संतोष मस्ताना नामक व्यक्ति ने पेपर लीक की सूचना डीएसपी को दी थी, लेकिन उसके बयान के बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति कह रहा है कि उसे उम्मीदवारों से फोन आए थे, तो यह पूछना आवश्यक था कि किन उम्मीदवारों ने संपर्क किया और उनके नाम क्या हैं।कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच केवल सतही स्तर पर की जा रही है, जबकि गहराई से छानबीन की आवश्यकता है।
सरकार और जेएसएससी का पक्ष
सरकार और जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि अब तक मिले तथ्यों से पेपर लीक की पुष्टि नहीं होती है। प्रस्तुत साक्ष्यों में केवल फटे हुए प्रश्नपत्रों के अंश और हाथ पर लिखे कुछ प्रश्न मिले हैं। यह भी कहा गया कि कुछ लोगों ने अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें नेपाल और अन्य जगहों पर कथित प्रश्नपत्र रटवाए थे, जिससे यह धोखाधड़ी का मामला प्रतीत होता है।
अभ्यर्थियों की दलील
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन और अमृतांश वत्स ने दलील दी कि इतने लंबे समय तक परिणाम रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट चाहे तो परिणाम को अंतिम आदेश के अधीन रखते हुए जारी कर सकता है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
सीबीआई जांच की मांग
प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अपराजिता भारद्वाज ने जांच की गति और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसे जानबूझकर प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने अदालत के समक्ष ऐसे प्रश्न भी रखे जो कथित लीक पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र दोनों में मौजूद थे। अधिवक्ताओं ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराई।



















