झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य में बालू की कीमतों में फिर उछाल की आशंका, अवैध खनन पर रोक से बढ़ सकती है दरें
After the order of Jharkhand High Court, there is a possibility of a rise in the prices of sand in the state, rates may increase due to the ban on illegal mining

झारखंड के खान एवं भूतत्व विभाग बीते दिनों रांची के कैटेगरी -2 के 19 बालू घाटों की ई –नीलामी की घोषणा कर चुकी है. लेकिन अब इसमें पेंच फंसने वाला है, क्योंकि हाईकोर्ट नें साफ तौर पर कह दिया है कि जब तक राज्य में पेसा नियम लागू होने तक बालू खदानों की नीलामी नहीं होगी.
कोर्ट का सख्त आदेश नहीं होगी बालूघाटों की नीलामी!
दरअसल, मंगलवार को कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए कहा कि जब तक अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा को संसाधनों पर अधिकार देने वाले पेसा नियम की अधिसूचना जारी नहीं हो जाती .तब तक राज्य में किसी भी लघु खनिज खदान की नीलामी नहीं की जाएगी. इस आदेश से फिलहाल जिलों में चल रही बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया रुक जाएगी.
गौरतलब है कि कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी. जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार जानबूझकर नियमों को अधिसूचित करने में देरी कर रही है, ताकि इस बीच बालू घाटों और अन्य खनिज खदानों की दीर्घकालिक नीलामी और पट्टे जारी कर दिए जाएं. इससे ग्राम सभाओं को मिलने वाले अधिकार व्यर्थ हो जाएंगे. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नियम अधिसूचित करने के लिए चार सप्ताह का समय देने से इनकार करते हुए केवल दो सप्ताह की मोहलत दी है. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी.
हाईकोर्ट ने किसे लगा दिया फटकार
इतना ही नहीं सुनवाई के दौरान जब पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव मनोज कुमार ने यह जिम्मेदारी सीएम और मंत्रियों पर डालने की बात कही तो, कोर्ट ने तीख रुख अपनाते हुए पूछ दिया कि क्या आप चाहते हैं कि हम सीएम और मंत्रियों को जेल भेजे दें. यहीं आप कह रहे हैं. साथ ही आगे कहा कि राज्य सरकार 73वें संविधान संशोधन की मंशा को ठेंगा दिखा रही है. जबकि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए.
18 सितंबर से होनी थी नीलामी
गौरतलब है कि बीते दिनों ही बालू घाटों की नीलामी की बात सामने आई थी. उस दौरान कहा गया था कि यह नीलामी ई- प्रोक्योरमेंट मोड के जरिए jharkhandtenders.gov.in पर 18 सितंबर की सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक होगी. नीलामी की बात सामने आते हैं उम्मीद की जा रही थी कि अब रांची जिले में लंबे समय से चल रही बालू की किल्लत का समाधान हो जाएगा. क्योंकि जिला प्रशासन ने भी जिले के 42 बालूघाटों के ऑक्शन की प्रक्रिया तेज कर दी थी. रांची और आसपास वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के लिए बालू की मांग लगातार बढ़ रही है और आपूर्ति सीमित होने के वजह से लोग परेशान है. अवैध खनन और अनियमित आपूर्ति के कारण अक्सर बालू की कीमतें आसमान छूने लगती है. नतीजन छोटे ठेकेदारों और आम लोगों के लिए घर बनाना मंहगा पड़ जाता है.
सात समूह में बांटा गया है बालूघाट
खनन विभाग के अनुसार, रांची जिले में कुल 42 बालूघाट है. ये बालूघाट स्वर्णरेखा, कोयल, तजना और अन्य छोटी नदियों के किनारे फैला हुआ है. बाबूघाट का वितरण रांची के अन्य प्रखंडों जैसे नामकुम, रातू, मांडर, चान्हों, बेरो, ओरमांझी और कांके में है. इन्हें सात समूहों में बांटा गया है.
- पहला नामकुम समूह इसमें स्वर्णरेखा नदी किनारे 6 बालूघाट, सबसे अधिक मांग वाला क्षेत्र.
- दूसरा रातू समूह इसमें कोयल नदी के किनारे 5 बालूघाट, मध्यम स्तर का उत्पादन.
- तीसरा मांडर समूह. इसमें 7 बालूघाट बड़े पैमाने पर आपूर्ति के लिए अहम माने जाते हैं.
- चौथा चान्हो समूह, इस समूह में 6 बालूघाट है. जिसमें स्थानीय निर्माण कार्यों की आपूर्ति के लिए उपयोग होती है.
- पांचवा बेड़ो समूह, इसमें 5 बालूघाट है. जो छोटे और मध्यम स्तर के उपयोग के लिए जाने जाते हैं.
- छठा ओरमांझी समूह. इसमें 7 बालूघाट,स्वर्णरेखा और अन्य नदियों के किनारे बने बालूघाट शामिल है.
- सातवां कांके समूह जिसमें 6 बालूघाट है. जो रांची के बाहरी इलाकों को आपूर्ति करता है.
बहरहाल अब एक बार फिर से बालू घाटों का नीलामी रोक दी गई है. जिससे घाटों बालूघाटों का संचालन में कई तरह के दिक्कतें आएंगी.. निर्माण कार्यों में देरी होगी और लोगों को फिर से बालू की किल्लत झेलना पड़ेगा. और शायद बालू घाटों की नीलामी नहीं होने से दोबारा अवैध खनन और कालाबाजारी के कारण बालू की कीमतें आसमान छूएंगी.









