झारखंड- आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं उतरेगी आंदोलन पर, कल से मुख्यमंत्री निवास के सामने देगी धरना, ये है मांगें…

Jharkhand- Anganwadi workers and helpers will go on strike, will sit on dharna in front of the Chief Minister's residence from tomorrow, these are their demands...

रांची । झारखंड में एक बार फिर आंदोलन का शोर सुनायी पड़ रहा है। प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 10 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर उतर रही है। यूनियन के बैनर तले आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाएं मुख्यमंत्री आवास के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन करेंगी। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

 

यूनियन की प्रमुख मांगें

यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिन्हा ने बताया कि उनकी मुख्य मांग है कि सेविका और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति के समय न्यूनतम 5 लाख रुपये का आर्थिक लाभ और मानदेय की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जानी चाहिए।

 

उन्होंने एफआरएस (फेस रिकॉग्निशन सिस्टम) पर आधारित प्रणाली का भी विरोध किया और कहा कि इससे सेविकाओं को रोजाना तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही मांग की गई है कि सेविकाओं को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और अन्य गैर-आंगनबाड़ी कार्यों से मुक्त किया जाए ताकि वे पूरी तरह बच्चों और मातृ-शिशु पोषण सेवाओं पर ध्यान दे सकें।

 

रिटायरमेंट पर कोई लाभ नहीं

बालमुकुंद सिन्हा ने कहा कि झारखंड में वर्तमान व्यवस्था के तहत 62 साल की आयु पूरी होते ही सेविकाओं और सहायिकाओं को सेवा से बाहर कर दिया जाता है। इसके बाद उन्हें किसी तरह का सेवानिवृत्ति लाभ या पेंशन नहीं मिलता। इससे उनका जीवन और कठिन हो जाता है। यूनियन का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती, तो मजबूरन अनिश्चितकालीन धरना ही एकमात्र रास्ता बचता है।

 

मुख्यमंत्री से अपील

रांची । झारखंड में एक बार फिर आंदोलन का शोर सुनायी पड़ रहा है। प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 10 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर उतर रही है। यूनियन के बैनर तले आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाएं मुख्यमंत्री आवास के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन करेंगी। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

 

80 हजार सेविका-सहायिकाओं का सवाल

झारखंड में करीब 80 हजार आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाएं कार्यरत हैं। इनकी सबसे बड़ी नाराजगी यह है कि राज्य सरकार उन्हें न तो स्थायी कर्मचारी का दर्जा देती है और न ही सेवा समाप्त होने के बाद कोई आर्थिक सुरक्षा। यूनियन की मांग है कि पश्चिम बंगाल की तर्ज पर झारखंड की सेविकाओं को भी 5 लाख रुपये का आर्थिक लाभ और आधा मानदेय पेंशन के रूप में दिया जाए।

 

गौरतलब है कि इससे पहले यूनियन ने 8 सितंबर से धरना शुरू करने का ऐलान किया था, लेकिन रणनीतिक कारणों से उसे स्थगित कर अब 10 सितंबर की नई तारीख तय की गई है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार सेविकाओं की मांगों को मानकर विवाद को सुलझाती है या आंदोलन लंबा खिंचता है।

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