झारखंड : जीएसटी काउंसिल की बैठक में झारखंड की मांग: केंद्र से क्षतिपूर्ति अनुदान और राजस्व घाटे का समाधान करने की गुहार

Jharkhand's demand in GST Council meeting: Request to the Center to resolve compensation grant and revenue deficit

केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में GST Council Meeting शुरू

रांची: दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST Council Meeting 2025 शुरू हो गई है। इस बैठक में देशभर के वित्त मंत्री शामिल हैं। झारखंड की ओर से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और रामेश्वर उरांव मौजूद हैं। झारखंड सरकार ने केंद्र से जीएसटी के कारण हो रहे राजस्व घाटे की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति अनुदान की मांग रखी है।




झारखंड की दलील: गरीब राज्य और कम उपभोग

झारखंड सरकार ने कहा कि राज्य अति पिछड़ा और गरीब है, जहां प्रति व्यक्ति आय केवल ₹15,274 है। जीएसटी डेस्टिनेशन आधारित कर है, जिससे उपभोक्ता अधिक वाले राज्यों को फायदा होता है। झारखंड में उपभोक्ता कम होने के कारण कर संग्रहण की संभावना घट जाती है। इसी वजह से राज्य को केंद्र से विशेष वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है।


कोयला उत्पादक राज्यों के लिए विशेष रियायत

वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कोयला उत्पादन से मिलने वाले सीमित राजस्व को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कोयला उत्पादक राज्यों को GST क्षतिपूर्ति में विशेष रियायत मिलनी चाहिए ताकि ये राज्य वित्तीय दबाव में न आएं।


GST स्लैब में बदलाव का प्रस्ताव

बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण एजेंडा जीएसटी स्लैब में बदलाव है। केंद्र सरकार 12% और 28% स्लैब को खत्म कर टैक्स संरचना को सरल बनाने पर विचार कर रही है। स्लैब कटौती से उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिलेगी, लेकिन राज्यों के राजस्व में कमी हो सकती है। इसी कारण कई राज्य क्षतिपूर्ति अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।


विपक्ष शासित राज्यों की चिंता

हाल ही में आठ विपक्ष शासित राज्यों ने केंद्र से आग्रह किया कि स्लैब घटने पर होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई के लिए अतिरिक्त अनुदान दिया जाए। उनका कहना है कि जीएसटी राजस्व कई विकास योजनाओं का आधार है और कमी का सीधा असर जनता पर पड़ेगा।


जनता को क्या मिलेगा फायदा?

अगर स्लैब कटौती होती है, तो उपभोक्ता वस्तुओं पर टैक्स कम होगा। संभावित बदलाव: 28% से घटकर 18% और 12% से घटकर 5%। इससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्टील, सीमेंट और टेक्सटाइल क्षेत्र में राहत मिल सकती है। सभी पक्षों का मानना है कि यह लाभ सीधे आम उपभोक्ता तक पहुंचे।

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