झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका भर्ती प्रक्रिया पर लगाई रोक, JSSC से मांगा जवाब
Jharkhand High Court stays the female supervisor recruitment process, seeks response from JSSC

हाईकोर्ट ने रोकी महिला पर्यवेक्षिका भर्ती
झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। गुरुवार को जस्टिस आनंद सेन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब विज्ञापन में केवल “स्नातक उत्तीर्ण महिला” की योग्यता मांगी गई थी, तो डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद “स्नातक प्रतिष्ठा (Honours)” की डिग्री कैसे अनिवार्य की जा सकती है।
JSSC से मांगा स्पष्टीकरण
अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में बाद में शर्त जोड़ना नियमों के खिलाफ है।
भर्ती प्रक्रिया की स्थिति
बाल कल्याण विभाग ने 444 महिला पर्यवेक्षिका पदों पर नियुक्ति के लिए अधियाचना JSSC को भेजी थी। इसके बाद लिखित परीक्षा हुई और सफल अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी किया गया। लेकिन JSSC ने सामान्य स्नातक वाले कई उम्मीदवारों को बाहर कर दिया और केवल “स्नातक प्रतिष्ठा” धारकों को योग्य माना।
अभ्यर्थियों की दलील
अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने तर्क दिया कि विज्ञापन और नियमावली में “प्रतिष्ठा” शब्द का कहीं उल्लेख नहीं था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई शर्त जोड़ना अनुचित है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि किसी भी पद को पूरी तरह से महिलाओं के लिए आरक्षित करना संवैधानिक सवाल खड़े करता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है। इनका काम आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी करना और लाभुकों तक सरकारी योजनाओं की सुविधाएं पहुंचाना है। नई नियुक्तियों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आ सकती है।