झारखंड विधानसभा ने पारित किया प्रस्ताव, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिलेगा भारत रत्न?

Jharkhand assembly passed the resolution, will Dishom Guru Shibu Soren get Bharat Ratna?

झारखंड विधानसभा में ऐतिहासिक प्रस्ताव

झारखंड विधानसभा के पूरक मानसून सत्र ने 28 अगस्त को एक ऐतिहासिक फैसला लिया। सदन में परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

पहले दिन ही उठी थी मांग

सत्र की शुरुआत 22 अगस्त को हुई थी। उसी दिन कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव के दौरान गुरुजी को भारत रत्न देने की मांग रखी थी। इस मांग का समर्थन जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो और अरूप चर्टजी ने भी किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तब संकेत दिया था कि सरकार इस मांग को गंभीरता से लेगी।

गुरुजी का योगदान और सम्मान की मांग

4 अगस्त को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में शिबू सोरेन का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद राज्यभर में उन्हें भारत रत्न देने की मांग तेज हो गई। पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर सहित कई नेताओं ने न केवल उन्हें भारत रत्न देने की बात कही, बल्कि उनकी स्मृति में रांची और नेमरा में स्मारक बनाने और उनकी जीवनी को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी उठाई।

जीवन संघर्ष और आंदोलनकारी छवि

11 जनवरी 1944 को जन्मे शिबू सोरेन ने पिता की हत्या के बाद पढ़ाई छोड़ दी और महाजनी-साहूकारी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। उन्होंने धानकटनी आंदोलन, रात्रि पाठशालाओं और नशामुक्ति अभियान से आदिवासी समाज में जागरूकता लाई। बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन कर उन्होंने अलग राज्य आंदोलन को नई दिशा दी।

राज्य निर्माण में भूमिका और राजनीतिक सफर

शिबू सोरेन 2000 में बने झारखंड राज्य के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वालों में रहे। वे तीन बार मुख्यमंत्री, आठ बार लोकसभा सांसद और तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे। आदिवासी समाज उन्हें केवल नेता ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और ‘दिशोम गुरु’ यानी मार्गदर्शक मानता है।

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