शिक्षकों से ‘श्रमिक’ तक की ड्यूटी: गैर शैक्षणिक विभागीय जिम्मेदारियों से जूझ रहे हैं शिक्षक, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
Duty from teachers to 'labourers': Teachers are struggling with non-academic departmental responsibilities, All Jharkhand Primary Teachers Association submitted a memorandum to DC

जमशेदपुर | स्कूलों के शिक्षक अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। पढ़ाई के अलावा विभिन्न विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी ने उन्हें सामग्री ढोने से लेकर आधार कार्ड बनवाने, बैंक खाता खुलवाने, चावल उठाने और BLO की भूमिका निभाने तक सीमित कर दिया है। इन्हीं समस्याओं से नाराज होकर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्वी सिंहभूम जिला इकाई ने उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है और ठोस समाधान की मांग की है।
कक्षाओं के बदले BRC/URC के चक्कर
संघ ने बताया कि शिक्षकों को विद्यालय अवधि के बाद BRC/URC जाकर किताबें, स्कूल बैग, टीएलएम, नोटबुक जैसी सामग्री लानी पड़ती है, लेकिन अधिकांश विद्यालय BRC/URC से 20-25 किमी दूर स्थित हैं। मात्र ₹300 वाहन भाड़ा निर्धारित है, जबकि कई बार शिक्षकों को तीन-चार बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। अन्य सामग्रियों के लिए तो कोई भाड़ा प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में शिक्षकों को अपनी जेब से खर्च कर सामग्री विद्यालय लानी पड़ती है।
MDM चावल: आदेश है ‘डोर स्टेप’, लेकिन जिम्मेदारी शिक्षकों पर
संघ ने MDM चावल के डोर स्टेप डिलीवरी की पुरानी योजना का हवाला देते हुए बताया कि ठेकेदार ने “कम भुगतान” का हवाला देकर हाथ खींच लिया, जिसके बाद फिर शिक्षकों को ही चावल उठाकर स्कूल तक लाना पड़ रहा है। वर्षों से उन्हें वाहन भाड़ा भी नहीं मिला है।
गुरुगोष्ठी और रिपोर्टिंग: समय की असमंजसता
JCERT के SOP में स्पष्ट है कि गुरुगोष्ठी विद्यालय अवधि में आयोजित होनी चाहिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे 3 बजे के बाद कराया जा रहा है, जिससे शिक्षकों को परेशानी हो रही है। संघ ने मांग की है कि SOP के अनुरूप विद्यालय अवधि में ही इसका आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
BLO से मुक्ति की भी मांग
संघ ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग, मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव के निर्देश के बावजूद अभी भी जिले में शिक्षकों को BLO और BLO सुपरवाइजर की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकांश BLO कार्य विद्यालय समय में होते हैं, जिससे पढ़ाई बाधित होती है।
‘शिक्षण’ से ‘सर्वेक्षण’ तक: शिक्षकों पर कार्यभार भारी
संघ ने बताया कि विभागीय निर्देशों के तहत नेत्र जांच, आधार पंजीकरण, पोशाक वितरण, नामांकन अभियान, बैंक खाता खुलवाना, बाल पंजी सर्वे और प्रशिक्षण जैसे दर्जनों कार्य शिक्षकों को विद्यालय अवधि में ही करने पड़ते हैं। इससे बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
संघ की मांगें
1. पाठ्य सामग्री व अन्य सामान की विद्यालय या संकुल स्तर तक डिलीवरी।
2. MDM चावल की डोर-स्टेप डिलीवरी की पुनः शुरुआत।
3. CRP के माध्यम से रिपोर्ट/प्रपत्र BRC/URC में जमा कराने की व्यवस्था।
4. गुरुगोष्ठी का आयोजन SOP अनुसार विद्यालय समय में ही।
5. शिक्षकों को BLO कार्य से पूर्णतः मुक्त किया जाए।









