जब भी घूमने की बात आती है, तो लोग अक्सर हिल स्टेशन जाने की बात करने लगते हैं या फिर साउथ में घूमने की प्लानिंग करने लगते हैं।

पर क्या आप जानते हैं, बिहार में भी कई ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं, जो लोगों को देखने के लिए मजबूर कर देते हैं। छुट्टियों पर घूमने की प्लानिंग करते समय शायद ही किसी को बिहार जाने का ख्याल मन में आता होगा, तो चलिए आपके इस भ्रम को आज हम दूर कर देते हैं कि बिहार में कुछ देखने लायक नहीं है, आपको इस लेख में बताते हैं बिहार की कुछ ऐसी खास बेस्ट जगह जो यकीनन आपकी छुट्टियों का मजा दोगुना कर देंगी।

बिहार का इतिहास

बिहार को प्राचीन काल में मगध के नाम से जाना जाता था और इसकी राजधानी पटना को पाटलिपुत्र। यहां का इतिहास उतना ही पुराना है जितना भारत। यहां मौर्य, गुप्त और मुगल शासकों ने राज किया। माना यह जाता है कि बिहार शब्द की उत्पत्ति बौद्ध विहारों के विहार शब्द से हुई, जिसे बाद में बिहार कर दिया गया। यह राज्‍य नेपाल, पश्चिम बंगाल, यूपी और झारखण्ड से घिरा हुआ है। बिहार भारत के इतिहास में ऐतिहासिक, साहित्यिक और धार्मिक सभी स्‍तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। तो आइए जानते हैं इतनी खुबियों वाले राज्‍य में आप क्‍या-क्‍या देख सकती हैं।

बोधगया: (Bodhgaya)

बोधगया, बिहार की राजधानी पटना से लगभग 100 किमी दूर दक्षिण- पूर्व दिशा में स्थित है और गया जिला से सटा हुआ एक छोटा सा शहर है. ये शहर गंगा की सहायक नदी फल्गु नदी (Phalgu River) के किनारे पश्चिम दिशा में बसी हुई है. बौद्ध भिक्षुओं की ओर से बोधगया को दुनिया के सबसे पवित्र शहरों में से एक माना जाता है. क्योंकि यहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ती हुई थी. यहां मौजूद काफी पुराने महाबोधि मंदिर को वर्ष 2002 में यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया था. बौद्ध धर्म को मानने वालों के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी ध्यान(Meditation)करने और प्राचीन पर्यटन स्थलों को देखने के लिए बोधगया आते हैं.

नालंदा विश्वविद्यालय:(Nalanda University)

दुनिया के सबसे पुराने शिक्षण संस्थानों की बात जब भी आती है तो नालंदा विश्वविद्यालय का नाम सबसे ऊपर आता है. बिहार की राजधानी पटना से करीब 120 किलोमीटर दक्षिण-उत्तर में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं. इतिहासकारों की मानें तो, यह भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विश्वविख्यात केंद्र था.

बिहार के नालंदा में स्थित इस विश्वविद्यालय में आठवीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के बीच दुनिया के कई देशों से छात्र पढ़ने आते थे. बताया जाता है कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फ्रांस और तुर्की से छात्र इस विश्वविद्यालय आते थे. आज वो विश्वविद्यालय खंडहर में तब्दील हो गया,

नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध केन्द्र था. बौद्धकाल में भारत शिक्षा का केंद्र था. इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम (450-470) ने की थी. नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक इस विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थी. यहां इतनी किताबें रखी थीं कि जिन्हें गिन पाना आसान नहीं था. हर विषय की किताबें इस विश्वविद्यालय में मौजूद थीं.

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में तीन सौ कमरे, सात बड़े-बड़े कक्ष और अध्ययन के लिए नौ मंजिला एक विशाल पुस्तकालय था, जिसमें तीन लाख से भी अधिक किताबें थीं. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का पूरा परिसर एक विशाल दीवार से घिरा हुआ था, जिसमें प्रवेश के लिए एक मुख्य द्वार था.

सन् 1199 में तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इस विश्वविद्यालय को जला कर पूरी तरह से नष्ट कर दिया. कुछ इतिहासकार बताते हैं कि, इस विश्वविद्यालय में इतनी किताबें थीं कि पूरे तीन महीने तक आग धधकती रही थी।

इस शिक्षा-केंद्र में हीनयान बौद्ध धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे. यहां धर्म ही नहीं, राजनीति, शिक्षा, इतिहास, ज्योतिष, विज्ञान आदि की भी शिक्षा दी जाती थी. आज के समय यह बिहार राज्य का प्रमुख आकर्षण है।

वैशाली :(Vaishali)

बौद्धकाल में यह नगरी जैन और बौद्ध धर्म का केंद्र थी। यह भूमि महावीर स्वामी की जन्मभूमि और भगवान बुद्ध की कर्मभूमि है। इसी नगर क्षेत्र के बसोकुंड गांव के पास कुंडलपुर में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म हुआ था। भगवान महावीर वैशाली राज्य में लगभग 22 वर्ष की उम्र तक रहे थे। यहां कई अशोक स्तंभ के अलावा कुछ बौद्ध स्तूप है और यही 4 किलोमीटर दूर कुंडलपुर में जैन मंदिर भी स्थित हैं

वैशाली एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो कभी लिच्छवी शासकों की राजधानी थी। वैशाली ने अंतिम जैन तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्धि अर्जित की। ऐसा माना जाता है कि महावीर का जन्म और पालन-पोषण छठी शताब्दी ईसा पूर्व वैशाली गणराज्य के कुंडलग्राम में हुआ था। अवशेष स्तूप, कुटागरशाला विहार, राज्याभिषेक टैंक, विश्व शांति शिवालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संग्रहालय, बावन पोखर मंदिर, कुंडलपुर, राजा विशाल का गढ़, चौमुखी महादेव यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।।

राजगीर:(Rajgir)

पवित्र स्थल नालंदा से 19 किमी दूर राजगीर हिन्दू, बौद्ध एवं जैन धर्मों का पवित्र स्थल है, जो प्राचीनकाल में मगध राज्य की राजधानी था और जिसके ध्वंसावशेष यहाँ आज भी विद्यमान है पाटलिपुत्र की स्थापना से पूर्व राजगीर अपने उत्कर्ष के शिखर पर था, जहाँ खण्डहरों के रूप में क़िला, रथों के पथ, स्नानागार, स्तूप और महल मौजूद हैं।भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के अनेक वर्ष यहाँ व्यतीत किए थे।भगवान महावीर ने अपना प्रथम प्रवचन राजगीर के विपुलागिरि नामक स्थान पर प्रारम्भ किया था।मुसलमान फ़कीर मख़दूम शाह ने भी इसी स्थान पर साधना की थी, जहाँ उनकी एक मज़ार स्थापित की गई है।2200 फीट लम्बे इस रज्जुमार्ग में 114 कुर्सियाँ हैं।राजगीर की सुन्दर घाटी में जापान द्वारा निर्मित आकाशीय रज्जुपथ (रोप वे) की व्यवस्था, जिससे गृद्धकूट पर्वत से रत्नागिरि पर्वत तक आ-जा सकते हैं।

पटना:(Patna)

गंगा के दक्षिणी तट पर स्थित पटना बिहार का सबसे बड़ा शहर है। प्राचीन भारत में पाटलिपुत्र के रूप में जाना जाने वाला यह शहर दुनिया के सबसे पुराने बसे हुए शहरों में से एक माना जाता है। पटना सिख भक्तों के लिए एक तीर्थस्थल है क्योंकि इसे अंतिम सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जन्मस्थान माना जाता है। हर्यंका, नंदा, मौर्य, शुंग, गुप्त और पाल के काल में ये शहर पूरे भारत में काफी उभरकर सामने आया था। आज का पटना एक विकासशील शहर है, मॉल्स, हाई फाई होटल्स और थिएटर्स से यहां की रौनक और बढ़ गई है। कुम्हरार, आगम, कुआं, दीदारगंज यक्षी, तख्त श्री पटना साहिब, गुरुद्वारा पहिला बड़ा, गुरुद्वारा गोबिंद घाट, गुरुद्वारा गुरु का बाग, गुरुद्वारा बाल लीला, पटना संग्रहालय, किला हाउस यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

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