शुभ मुहूर्तों से भरा रहेगा पूरा साल, इस बार 11 त्योहार आयेंगे 9-10 दिन पहले, दुर्गापूजा से लेकर दीपावली तक में होगी 16 से 18 दिन देरी, देखिये लिस्ट

2026 New Year : नया साल 2026 धार्मिक आस्था, व्रत-त्योहारों और शुभ मुहूर्तों की दृष्टि से अत्यंत विशेष रहने वाला है। वर्ष की शुरुआत मकर संक्रांति और वसंत पंचमी जैसे शुभ पर्वों से होगी, जबकि दीपावली, होली, नवरात्रि, छठ और अन्य बड़े त्योहार सालभर श्रद्धा और उल्लास का माहौल बनाए रखेंगे। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों के लिए भी 2026 में अनेक शुभ योग और अबूझ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। खास बात यह है कि इस वर्ष पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) भी रहेगा, जिसका धार्मिक महत्व विशेष माना गया है।

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों खास है 2026
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष 2026 धार्मिक रूप से अत्यंत फलदायी रहेगा। इस साल ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी बनेगी, जिससे शुभ योगों में किए गए कार्य लंबे समय तक स्थिरता और सफलता प्रदान करेंगे। पंडितों का मानना है कि 2026 में गुरु और शनि का राशि परिवर्तन समाज, अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव डालेगा। इससे धार्मिक आयोजनों, व्रत-उत्सव, कथा-पुराण और तीर्थ यात्राओं के प्रति लोगों की आस्था और अधिक बढ़ेगी।

मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही
ज्योतिषाचार्य आचार्य संदीप तिवारी के अनुसार, महावीर पंचांग के मुताबिक मकर संक्रांति सूर्य (सौर वर्ष) पर आधारित पर्व है। इसी कारण वर्ष 2026 में भी मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसका पुण्यकाल 14 जनवरी की रात 9 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होगा। इसी समय सूर्य उत्तरायण होंगे और खरमास समाप्त हो जाएगा, जिससे 15 जनवरी को संक्रांति मनाना विशेष रूप से शुभ और लाभकारी माना गया है।

2026: 13 महीनों वाला साल
वर्ष 2026 हिंदी पंचांग के अनुसार अधिकमास वाला वर्ष होगा। इस साल दो ज्येष्ठ माह पड़ने से पूरा वर्ष 13 महीनों का होगा। यही कारण है कि 2025 की तुलना में वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में अधिकांश त्योहार 9 से 10 दिन पहले आएंगे, जबकि बाद के छह महीनों में त्योहार 16 से 18 दिन देरी से मनाए जाएंगे।
उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2025 में होली 14 मार्च को थी, जबकि 2026 में यह 3–4 मार्च के आसपास मनाई जाएगी। वहीं दीपावली 2025 में 20 अक्टूबर को थी, जो 2026 में 8 नवंबर को यानी करीब 17–18 दिन बाद आएगी।

पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) का महत्व
आचार्य संदीप तिवारी के अनुसार अधिकमास हर तीन वर्ष में आता है, ताकि चंद्र वर्ष (354 दिन) और सौर वर्ष (365 दिन) के अंतर को संतुलित किया जा सके। 2026 में यह 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस दौरान पूजा-पाठ, दान-धर्म, व्रत, मंत्र जप और तीर्थ स्नान विशेष फलदायी माने जाते हैं।

विवाह और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल वर्ष
नया साल 2026 विवाह के लिए बेहद शुभ रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जनवरी, फरवरी, अप्रैल, मई, जून और नवंबर महीने विवाह के लिए खास तौर पर अनुकूल रहेंगे।
• जनवरी–फरवरी: सूर्य मकर और कुंभ राशि में रहेगा, जिससे कई सर्वार्थसिद्ध योग बनेंगे।
• अप्रैल–जून: अक्षय तृतीया और विवाह पंचमी जैसे अबूझ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
• नवंबर: देवउठनी एकादशी के बाद विवाह का श्रेष्ठ समय रहेगा।
इन अबूझ मुहूर्तों में बिना पंचांग दोष के विवाह संपन्न किए जा सकेंगे, हालांकि विशेषज्ञ कुंडली अनुसार मुहूर्त तय करने की सलाह भी देते हैं।

गृह प्रवेश, यात्रा और नए कार्य
गृह प्रवेश के लिए बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया, दशहरा और देवउठनी एकादशी को सर्वोत्तम माना गया है। इन तिथियों पर पंचांग दोष नहीं होता। वहीं नए व्यापार, नौकरी जॉइनिंग, वाहन खरीद और लंबी यात्राओं के लिए पुष्य नक्षत्र, रवि पुष्य योग और गुरु पुष्य योग 2026 में विशेष शुभ फल देने वाले रहेंगे।

त्योहारों की बदलती तिथियां
2026 में कई त्योहार 9–10 दिन पहले आएंगे, जबकि कुछ पर्व 16–18 दिन की देरी से मनाए जाएंगे। इसके अलावा एक और खास बात यह है कि बाबूलाल कैलेंडर के अनुसार 2026 में कई बड़े पर्व शुक्रवार के दिन पड़ेंगे, जिससे धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में और अधिक उत्साह देखने को मिलेगा।
हिंदी पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) वाला वर्ष होगा। इसी कारण त्योहारों की तिथियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साल के पहले छह महीनों में कई पर्व सामान्य से 9–10 दिन पहले आएंगे, जबकि बाद के छह महीनों में प्रमुख त्योहार 16 से 18 दिन देरी से मनाए जाएंगे। इसका सीधा असर धार्मिक आयोजनों, विवाह मुहूर्त और सरकारी-शैक्षणिक कैलेंडर पर भी पड़ेगा।

2026 में जो त्योहार 9–10 दिन पहले आएंगे
त्योहार 2025 में 2026 में अंतर
मौनी अमावस्या 29 जनवरी 18 जनवरी 10 दिन पहले
वसंत पंचमी 3 फरवरी 23 जनवरी 10 दिन पहले
महाशिवरात्रि 26 फरवरी 15 फरवरी 10 दिन पहले
होली 14 मार्च 3–4 मार्च 10 दिन पहले
गुड़ी पड़वा 30 मार्च 19 मार्च 10 दिन पहले
राम नवमी 6 अप्रैल 27 मार्च 9 दिन पहले
महावीर जयंती 10 अप्रैल 31 मार्च 9 दिन पहले
हनुमान जयंती 12 अप्रैल 2 अप्रैल 10 दिन पहले
अक्षय तृतीया 30 अप्रैल 20 अप्रैल 9 दिन पहले
बुद्ध पूर्णिमा 12 मई 1 मई 10 दिन पहले
गंगा दशहरा 5 जून 26 मई 9 दिन पहले
इन त्योहारों के पहले आने से स्कूल परीक्षाओं, धार्मिक आयोजनों और विवाह कार्यक्रमों की प्लानिंग में बदलाव देखने को मिलेगा।

2026 में जो त्योहार 16–18 दिन बाद आएंगे
त्योहार 2025 में 2026 में अंतर
जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून 16 जुलाई 18 दिन बाद
चातुर्मास प्रारंभ 6 जुलाई 25 जुलाई 18 दिन बाद
रक्षा बंधन 9 जुलाई 28 जुलाई 18 दिन बाद
कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 4 सितंबर 17 दिन बाद
गणेशोत्सव 27 अगस्त 14 सितंबर 16 दिन बाद
शारदीय नवरात्र 22 सितंबर 11 अक्टूबर 18 दिन बाद
विजयादशमी (दशहरा) 2 अक्टूबर 21 अक्टूबर 18 दिन बाद
दीपावली 20 अक्टूबर 8 नवंबर 18 दिन बाद
इन त्योहारों की देरी से आने के कारण त्योहारों का मौसम देर तक चलेगा और वर्ष के अंतिम महीनों में धार्मिक गतिविधियों की अधिकता रहेगी।

त्योहारों की तिथियां क्यों बदलती हैं?
ज्योतिषाचार्य आचार्य संदीप तिवारी के अनुसार हिंदू त्योहार चंद्रमा की गति पर आधारित होते हैं। चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन का। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन साल में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) जोड़ा जाता है।
वर्ष 2026 में यह अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इसी कारण त्योहारों की तिथियों में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा।

 

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